होम / ज़िक्र और दुआओं का संग्रह
दुआएँ जो आप कभी भी पढ़ सकते हैं: दिल की मज़बूती के लिए, नेमतों के छिन जाने और मुश्किलों से हिफ़ाज़त के लिए, क़र्ज़ और फ़िक्र से छुटकारे के लिए, और मग़फ़िरत और रहमत माँगने के लिए।
رَبَّنَآ ءَاتِنَا فِى ٱلدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِى ٱلْـَٔاخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ ٱلنَّارِ
मतलब
ऐ अल्लाह, हमें दुनिया में भी भलाई दे, आख़िरत में भी भलाई दे और हमें जहन्नम के अज़ाब से बचा।
फ़ज़ीलत
यह वह दुआ है जो नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सबसे ज़्यादा पढ़ा करते थे, जैसा कि सहाबी अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु ने बताया है।
स्रोत: QS. Al-Baqarah: 201, al-Bukhari: 6389, HR. Muslim: 2690.
يَـٰمُقَلِّبَ ٱلْقُلُوبِ ثَبِّتْ قَلْبِى عَلَىٰ دِينِكَ
मतलब
ऐ दिलों को पलटने वाले, मेरे दिल को अपने दीन पर जमाए रख।
फ़ज़ीलत
इंसान का दिल अल्लाह तआला की उंगलियों के बीच है, और वह जैसे चाहता है उसे पलटता है। इसलिए इंसान को चाहिए कि हमेशा अल्लाह से माँगे कि वह उसके दिल को भलाई पर जमाए और हक़ पर हमेशा साबित-क़दम रखे।
स्रोत: HR. at-Tirmidzi, No. 3522 dan Ahmad, 6: 315
ٱللَّهُمَّ مُصَرِّفَ ٱلْقُلُوبِ صَرِّفْ قُلُوبَنَا عَلَىٰ طَاعَتِكَ
मतलब
ऐ अल्लाह, दिलों को फेरने वाले, हमारे दिलों को अपनी इताअत और इबादत की तरफ़ फेर दे।
फ़ज़ीलत
इंसान का दिल अल्लाह तआला की उंगलियों के बीच है, और वह जैसे चाहता है उसे पलटता है। इसलिए इंसान को चाहिए कि हमेशा अल्लाह से माँगे कि वह उसके दिल को भलाई पर जमाए और हक़ पर हमेशा साबित-क़दम रखे।
स्रोत: HR. Muslim No. 2654
رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا
मतलब
ऐ हमारे रब, हमें हिदायत देने के बाद हमारे दिलों को टेढ़ा न कर।
फ़ज़ीलत
इंसान का दिल अल्लाह तआला की उंगलियों के बीच है, और वह जैसे चाहता है उसे पलटता है। इसलिए इंसान को चाहिए कि हमेशा अल्लाह से माँगे कि वह उसके दिल को भलाई पर जमाए और हक़ पर हमेशा साबित-क़दम रखे।
स्रोत: QS. Ali Imran: 8
ٱللَّهُمَّ إِنِّىٓ أَعُوذُ بِكَ مِن زَوَالِ نِعْمَتِكَ وَتَحَوُّلِ عَافِيَتِكَ وَفُجَاءَةِ نِقْمَتِكَ وَجَمِيعِ سَخَطِكَ
मतलब
ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह माँगता हूँ तेरी दी हुई नेमत के छिन जाने से, तेरी दी हुई आफ़ियत (सेहत) के बदल जाने से, तेरे अचानक आने वाले अज़ाब से, और तेरी हर तरह की नाराज़गी से।
फ़ज़ीलत
आज जो नेमत हासिल है वह बहुत मुमकिन है कि छिन जाए, यहाँ तक कि जिस्म और ज़ेहन की सेहत भी पलक झपकते बीमारी में बदल सकती है, और सिर्फ़ अल्लाह ही इसे रोकने की क़ुदरत रखता है।
स्रोत: HR. Muslim No. 2739
ٱللَّهُمَّ إِنِّىٓ أَعُوذُ بِكَ مِن جَهْدِ ٱلْبَلَـَٔاءِ وَدَرَكِ ٱلشَّقَـَٔاءِ وَسُوٓءِ ٱلْقَضَـَٔاءِ وَشَمَاتَةِ ٱلْأَعْدَءَاءِ
मतलब
ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह माँगता हूँ बहुत भारी मुसीबत से, बदबख़्ती के आ घेरने और उसकी तमाम वजहों से, तक़दीर में लिखी बुराई के बुरे अंजाम से, और मुझ पर आई मुसीबत पर दुश्मनों के ख़ुश होने से।
फ़ज़ीलत
नुक़सान पहुँचाने वाली तक़दीर से पनाह माँगना अल्लाह की तक़दीर पर राज़ी रहने के ख़िलाफ़ नहीं है। अल्लाह से हिफ़ाज़त माँगना ख़ुद उसकी तक़दीर का हिस्सा है। अल्लाह किसी के लिए आज़माइश मुक़द्दर कर सकता है, और यह भी मुक़द्दर कर सकता है कि जब वह इंसान दुआ करे तो वह उस आज़माइश को टाल दे।
स्रोत: HR. al-Bukhari: 6616, Muslim: 2707
ٱللَّهُمَّ إِنِّىٓ أَعُوذُ بِكَ مِنَ ٱلْهَمِّ وَٱلْحَزَنِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ ٱلْعَجْزِ وَٱلْكَسَلِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ ٱلْجُبْنِ وَٱلْبُخْلِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ غَلَبَةِ ٱلدَّيْنِ وَقَهْرِ ٱلرِّجَالِ
मतलब
ऐ अल्लाह, मैं फ़िक्र और ग़म से तेरी पनाह माँगता हूँ, मैं कमज़ोरी और सुस्ती से तेरी पनाह माँगता हूँ, मैं बुज़दिली और कंजूसी से तेरी पनाह माँगता हूँ, मैं क़र्ज़ के बोझ और लोगों के दबाव से तेरी पनाह माँगता हूँ।
फ़ज़ीलत
इस हदीस को रिवायत करने वाले मुअज़्ज़ज़ सहाबी अबू उमामा ने कहा: जब मैंने यह दुआ पढ़ी, तो अल्लाह ने सच में मेरी फ़िक्र दूर कर दी और मुझे अपना क़र्ज़ चुकाने की तौफ़ीक़ दे दी।
स्रोत: HR. Abu Dawud No. 1555
ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِى بِنِعْمَتِهِۦ تَتِمُّ ٱلصَّـٰلِحَـٰتُ
मतलब
सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है, जिसकी नेमत से अच्छी चीज़ें पूरी होती हैं।
फ़ज़ीलत
आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने कहा, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब कोई पसंद की चीज़ देखते, तो ऊपर वाला जुमला पढ़ते।
स्रोत: HR. Ibnu Majah dalam Sunannya, No. 3803 dan al-Hakim dalam al-Mustadrak (1/499)
رَبَّنَآ ءَامَنَّا فَٱغْفِرْ لَنَا وَٱرْحَمْنَا وَأَنتَ خَيْرُ ٱلرَّٰحِمِينَ
मतलब
ऐ हमारे रब, हम ईमान लाए, तो हमें माफ़ कर दे और हम पर रहम फ़रमा, तू सबसे बेहतर रहम करने वाला है
स्रोत: QS. Al-Mu'minun 109
رَبَّنَا ٱغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَإِسْرَافَنَا فِىٓ أَمْرِنَا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَٱنصُرْنَا عَلَى ٱلْقَوْمِ ٱلْكَـٰفِرِينَ
मतलब
ऐ हमारे रब, हमारे गुनाह और हमारे मामलों में हमारी ज़्यादतियाँ माफ़ कर दे, हमारे क़दम जमा दे, और काफ़िरों के मुक़ाबले में हमारी मदद फ़रमा
स्रोत: QS. Ali Imran 147
رَبَّنَآ إِنَّنَآ ءَامَنَّا فَٱغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَقِنَا عَذَابَ ٱلنَّارِ
मतलब
ऐ हमारे रब, हम सच में ईमान लाए, तो हमारे गुनाह माफ़ कर दे और हमें जहन्नम के अज़ाब से बचा
स्रोत: QS. Ali Imran 16
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