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ये वो अज़कार हैं जो नबी ﷺ फ़र्ज़ नमाज़ों के बाद पढ़ते थे, इस्तिग़फ़ार से शुरू होकर, जिनमें सुब्हानअल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह और अल्लाहु अकबर 33-33 बार शामिल हैं। हर एक के साथ अरबी, उच्चारण, मतलब और स्रोत है।
أَسْتَغْفِرُ ٱللَّهَ
मतलब
मैं अल्लाह से माफ़ी माँगता हूँ।
फ़ज़ीलत
जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपनी नमाज़ पूरी करते, तो तीन बार इस्तिग़फ़ार करते और ऊपर वाला ज़िक्र पढ़ते। इमाम औज़ाई ने बताया कि इस्तिग़फ़ार के अल्फ़ाज़ हैं: अस्तग़फ़िरुल्लाह, अस्तग़फ़िरुल्लाह।
स्रोत: HR. Muslim No. 591
ٱللَّهُمَّ أَنتَ ٱلسَّلَـٰمُ وَمِنكَ ٱلسَّلَـٰمُ تَبَارَكْتَ يَـٰذَا ٱلْجَلَـٰلِ وَٱلْإِكْرَامِ
मतलब
ऐ अल्लाह, तू अस-सलाम है, और तुझसे ही सलामती है। तू बड़ी बरकत वाला है, ऐ जलाल और इज़्ज़त वाले।
फ़ज़ीलत
जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपनी नमाज़ पूरी करते, तो तीन बार इस्तिग़फ़ार करते और ऊपर वाला ज़िक्र पढ़ते। इमाम औज़ाई ने बताया कि इस्तिग़फ़ार के अल्फ़ाज़ हैं: अस्तग़फ़िरुल्लाह, अस्तग़फ़िरुल्लाह।
स्रोत: HR. Muslim No. 591
لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ وَحْدَهُۥ لَا شَرِيكَ لَهُۥ لَهُ ٱلْمُلْكُ وَلَهُ ٱلْحَمْدُ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ ٱللَّهُمَّ لَا مَانِعَ لِمَـَٔآ أَعْطَيْتَ وَلَا مُعْطِىَ لِمَا مَنَعْتَ وَلَا يَنفَعُ ذَا ٱلْجَدِّ مِنكَ ٱلْجَدُّ
मतलब
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ रब नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। तारीफ़ उसी की है और बादशाही उसी की है। वह हर चीज़ पर क़ादिर है। ऐ अल्लाह, जो तू दे उसे कोई रोकने वाला नहीं और जो तू रोक ले उसे कोई देने वाला नहीं। किसी दौलत और शान वाले को उसकी दौलत और शान (उसके ईमान और नेक अमल के सिवा, जो उसे अज़ाब से बचाते हैं) कोई फ़ायदा नहीं देती। दौलत और शान सिर्फ़ तेरी ही तरफ़ से है।
स्रोत: HR. Bukhari No. 844 dan Muslim No. 593
لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ وَحْدَهُۥ لَا شَرِيكَ لَهُۥ لَهُ ٱلْمُلْكُ وَلَهُ ٱلْحَمْدُ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ لَّا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِٱللَّهِ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ وَلَا نَعْبُدُ إِلَّـَٔآ إِيَّاهُ لَهُ ٱلنِّعْمَةُ وَلَهُ ٱلْفَضْلُ وَلَهُ ٱلثَّنَـَٔاءُ ٱلْحَسَنُ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا ٱللَّهَ مُخْلِصِينَ لَهُ ٱلدِّينَ وَلَوْ كَرِهَ ٱلْكَـٰفِرُونَ
मतलब
अल्लाह के सिवा कोई रब (जो इबादत का हक़दार हो) नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही और तारीफ़ उसी की है। वह हर चीज़ पर क़ादिर है। अल्लाह (की मदद) के बिना न कोई ताक़त है न कोई क़ुव्वत। अल्लाह के सिवा कोई रब (जो इबादत का हक़दार हो) नहीं। हम उसके सिवा किसी की इबादत नहीं करते। नेमत, फ़ज़्ल और अच्छी तारीफ़ उसी के लिए है। अल्लाह के सिवा कोई रब (जो इबादत का हक़दार हो) नहीं, हम इबादत को उसी के लिए ख़ालिस करते हैं, चाहे काफ़िरों को बुरा लगे।
फ़ज़ीलत
अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर ने बताया कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नमाज़ के आख़िर में तहलील (ला इलाहा इल्लल्लाह) पढ़ा करते थे।
स्रोत: HR. Muslim No. 594
سُبْحَـٰنَ ٱللَّهِ
मतलब
अल्लाह पाक है
ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ
मतलब
सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है
ٱللَّهُ أَكْبَرُ
मतलब
अल्लाह सबसे बड़ा है
لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ وَحْدَهُۥ لَا شَرِيكَ لَهُۥ لَهُ ٱلْمُلْكُ وَلَهُ ٱلْحَمْدُ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ
मतलब
अल्लाह के सिवा कोई रब (जो इबादत का हक़दार हो) नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही उसी की है। तारीफ़ उसी की है। वह हर चीज़ पर क़ादिर है।
फ़ज़ीलत
जो ऊपर वाला ज़िक्र पढ़े, उसके गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं चाहे वे समुंदर के झाग के बराबर हों। इमाम नववी रहिमहुल्लाह ने कहा, हदीस के अल्फ़ाज़ से पता चलता है कि सुब्हानल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह और अल्लाहु अकबर हर एक अलग-अलग 33 बार पढ़ा जाए।
स्रोत: Syarh Shahih Muslim, 5: 84
ٱللَّهُ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ ٱلْحَىُّ ٱلْقَيُّومُ ۚ لَا تَأْخُذُهُۥ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ ۚ لَّهُۥ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۗ مَن ذَا ٱلَّذِى يَشْفَعُ عِندَهُۥٓ إِلَّا بِإِذْنِهِۦ ۚ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۖ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَىْءٍ مِّنْ عِلْمِهِۦٓ إِلَّا بِمَا شَآءَ ۚ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ ۖ وَلَا يَـُٔودُهُۥ حِفْظُهُمَا ۚ وَهُوَ ٱلْعَلِىُّ ٱلْعَظِيمُ
मतलब
अल्लाह, उसके सिवा कोई माबूद नहीं, वह हमेशा ज़िंदा रहने वाला, सबको संभालने वाला है। उसे न ऊँघ आती है न नींद। जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब उसी का है। कौन है जो उसकी इजाज़त के बिना उसके पास सिफ़ारिश कर सके? वह जानता है जो कुछ उनके आगे है और जो कुछ उनके पीछे है, और वे उसके इल्म में से किसी चीज़ का घेराव नहीं कर सकते सिवाय उसके जो वह चाहे। उसकी कुर्सी आसमानों और ज़मीन पर फैली हुई है, और उनकी हिफ़ाज़त उसे थकाती नहीं। और वह सबसे बुलंद, सबसे बड़ा है।
फ़ज़ीलत
जो हर नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़े, उसे जन्नत में दाख़िल होने से मौत के सिवा कोई चीज़ नहीं रोकती।
स्रोत: HR. an-Nasai dalam Al-Kubro 9: 44. Hadits ini dinyatakan shahih oleh Ibnu Hibban, sebagaimana disebut oleh Ibnu Hajar dalam Bulughul Maram
قُلْ هُوَ ٱللَّهُ أَحَدٌ ١ ٱللَّهُ ٱلصَّمَدُ ٢ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ ٣ وَلَمْ يَكُن لَّهُۥ كُفُوًا أَحَدٌ ٤
मतलब
कहो: वह अल्लाह एक है। अल्लाह बेनियाज़ है (सब उसके मोहताज हैं)। न उसकी कोई औलाद है और न वह किसी की औलाद है, और कोई उसके बराबर नहीं।
फ़ज़ीलत
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: शाम और सुबह तीन-तीन बार क़ुल हुवल्लाहु अहद और मुअव्विज़तैन (अल-फ़लक़ और अन-नास) पढ़ो, ये तुम्हें हर चीज़ से काफ़ी हो जाएँगी (हिफ़ाज़त करेंगी)।
स्रोत: HR. Abu Dawud No. 1523 dan an-Nasa'i No. 1337. Al Hafizh Abu Thohir mengatakan bahwa sanad hadits ini hasan
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ ١ مِن شَرِّ مَا خَلَقَ ٢ وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ ٣ وَمِن شَرِّ ٱلنَّفَّـٰثَـٰتِ فِى ٱلْعُقَدِ ٤ وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ ٥
मतलब
कहो: मैं सुबह के रब की पनाह माँगता हूँ, हर उस चीज़ की बुराई से जो उसने पैदा की, और अंधेरी रात की बुराई से जब वह छा जाए, और गिरहों में फूँकने वालियों की बुराई से, और हसद करने वाले की बुराई से जब वह हसद करे।
फ़ज़ीलत
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: शाम और सुबह तीन-तीन बार क़ुल हुवल्लाहु अहद और मुअव्विज़तैन (अल-फ़लक़ और अन-नास) पढ़ो, ये तुम्हें हर चीज़ से काफ़ी हो जाएँगी (हिफ़ाज़त करेंगी)।
स्रोत: HR. Abu Dawud No. 1523 dan an-Nasa'i No. 1337. Al Hafizh Abu Thohir mengatakan bahwa sanad hadits ini hasan
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ ١ مَلِكِ ٱلنَّاسِ ٢ إِلَـٰهِ ٱلنَّاسِ ٣ مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِ ٤ ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِ ٥ مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ ٦
मतलब
कहो: मैं इंसानों के रब की पनाह माँगता हूँ, इंसानों के बादशाह की, इंसानों के माबूद की, उस वसवसा डालने वाले की बुराई से जो (अल्लाह का ज़िक्र सुनकर) पीछे हट जाता है, जो इंसानों के सीनों में वसवसे डालता है, जिन्नों में से भी और इंसानों में से भी।
फ़ज़ीलत
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: शाम और सुबह तीन-तीन बार क़ुल हुवल्लाहु अहद और मुअव्विज़तैन (अल-फ़लक़ और अन-नास) पढ़ो, ये तुम्हें हर चीज़ से काफ़ी हो जाएँगी (हिफ़ाज़त करेंगी)।
स्रोत: HR. Abu Dawud No. 1523 dan an-Nasa'i No. 1337. Al Hafizh Abu Thohir mengatakan bahwa sanad hadits ini hasan
ٱللَّهُمَّ إِنِّىٓ أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَّافِعًا وَرِزْقًا طَيِّبًا وَعَمَلًا مُّتَقَبَّلًا
मतलब
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे फ़ायदेमंद इल्म (अपने लिए और दूसरों के लिए), हलाल रोज़ी और क़बूल होने वाले अमल (तेरे यहाँ, अच्छे बदले के साथ) माँगता हूँ।
फ़ज़ीलत
फ़ायदेमंद इल्म ऐसा तोशा है जो ज़िंदगी आसान बनाता है, अच्छी रोज़ी पाना इंसान की मेहनत का मक़सद है, और नेक अमल का क़बूल होना हर नेकी करने वाले की उम्मीद है। इसलिए बंदे को चाहिए कि हर सुबह अपने अलग-अलग काम शुरू करने से पहले ये 3 चीज़ें हमेशा माँगे।
स्रोत: HR. Ibnu Majah No. 925 dan Ahmad 6: 305, 322. Al-Hafizh Abu Thohir mengatakan bahwa hadits ini shahih
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