होम / ज़िक्र और दुआओं का संग्रह
हज और उमरा की दुआएँ और अज़कार, तलबिया से लेकर तवाफ़, सई और अरफ़ा के दिन तक, अरबी, उच्चारण, मतलब और स्रोत के साथ।
ٱللَّهُمَّ لَبَّيْكَ عُمْرَةً
मतलब
ऐ अल्लाह, मैं उमरा करने के लिए तेरी पुकार पर हाज़िर हूँ।
फ़ज़ीलत
मीक़ात से एहराम बाँधें और नीयत पढ़ें
ٱللَّهُمَّ لَبَّيْكَ حَجًّا
मतलब
ऐ अल्लाह, मैं हज करने के लिए तेरी पुकार पर हाज़िर हूँ।
फ़ज़ीलत
मीक़ात से एहराम बाँधें और नीयत पढ़ें
ٱللَّهُمَّ مَحِلِّى حَيْثُ حَبَسْتَنِى
मतलब
ऐ अल्लाह, जहाँ भी तू मुझे रोक दे, वहीं मेरे एहराम खोलने (तहल्लुल) की जगह है।
फ़ज़ीलत
यह शर्त कह लेने से - उमरा में भी और हज में भी -, अगर किसी को अपने मनासिक पूरे करने से रोक दिया जाए, तो उसके लिए तहल्लुल (एहराम खोलना) जायज़ है और उस पर दम (एक बकरी ज़बह करना) देना ज़रूरी नहीं।
لَبَّيْكَ ٱللَّهُمَّ لَبَّيْكَ لَبَّيْكَ لَا شَرِيكَ لَكَ لَبَّيْكَ إِنَّ ٱلْحَمْدَ وَٱلنِّعْمَةَ لَكَ وَٱلْمُلْكَ لَا شَرِيكَ لَكَ
मतलब
मैं हाज़िर हूँ, ऐ अल्लाह, मैं हाज़िर हूँ। मैं हाज़िर हूँ, तेरा कोई शरीक नहीं, मैं हाज़िर हूँ। बेशक सारी तारीफ़ और नेमतें तेरी ही हैं, और बादशाही भी, तेरा कोई शरीक नहीं।
फ़ज़ीलत
ऊपर वाला तलबिया पढ़ें और बार-बार दोहराएँ, मर्द आवाज़ ऊँची करके और औरतें धीमी आवाज़ में, यहाँ तक कि मक्का पहुँच जाएँ
स्रोत: HR. Al-Bukhari dengan Fathul Bari 3/408, Muslim 2/841
ٱللَّهُمَّ رَبَّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ ٱلسَّبْعِ وَمَـَٔآ أَظْلَلْنَ وَرَبَّ ٱلْأَرَضِينَ ٱلسَّبْعِ وَمَـَٔآ أَقْلَلْنَ وَرَبَّ ٱلشَّيَـٰطِينِ وَمَـَٔآ أَضْلَلْنَ وَرَبَّ ٱلرِّيَـٰحِ وَمَا ذَرَيْنَ أَسْأَلُكَ خَيْرَ هَـٰذِهِ ٱلْقَرْيَةِ وَخَيْرَ أَهْلِهَا وَخَيْرَ مَا فِيهَا وَأَعُوذُ بِكَ مِن شَرِّهَا وَشَرِّ أَهْلِهَا وَشَرِّ مَا فِيهَا
मतलब
ऐ अल्लाह, सातों आसमानों और जिन पर वे साया किए हुए हैं उनके रब, सातों ज़मीनों और जो कुछ वे उठाए हुए हैं उनके रब, शैतानों और जिन्हें वे गुमराह करते हैं उनके रब, हवाओं और जो कुछ वे उड़ाती हैं उनके रब। मैं तुझसे इस बस्ती की भलाई, इसके रहने वालों की भलाई और जो कुछ इसमें है उसकी भलाई माँगता हूँ। और मैं तेरी पनाह माँगता हूँ इस बस्ती की बुराई, इसके रहने वालों की बुराई और जो कुछ इसमें है उसकी बुराई से।
स्रोत: HR. Al-Hakim, menurut pendapatnya, hadits tersebut adalah sahih. Imam Adz-Dzahabi menyetujuinya 2/100, Ibnus Sunni, no. 524. Menurut Al-Hafizh Ibnu Hajar dalam Takhrij Adzkar 5/154: "Hadits tersebut adalah hasan." Bin Baz berkata: Hadits itu diriwayatkan pula oleh An-Nasai dengan sanad yang hasan. Lihat Tuhfatul Akhyar, hal. 37
أَعُوذُ بِٱللَّهِ ٱلْعَظِيمِ وَبِوَجْهِهِ ٱلْكَرِيمِ وَسُلْطَـٰنِهِ ٱلْقَدِيمِ مِنَ ٱلشَّيْطَـٰنِ ٱلرَّجِيمِ بِسْمِ ٱللَّهِ وَٱلصَّلَاةُ وَٱلسَّلَـٰمُ عَلَىٰ رَسُولِ ٱللَّهِ ٱللَّهُمَّ ٱفْتَحْ لِىٓ أَبْوَٰبَ رَحْمَتِكَ
मतलब
मैं अज़मत वाले अल्लाह की, उसके करीम चेहरे की और उसकी हमेशा रहने वाली सल्तनत की पनाह माँगता हूँ, मरदूद शैतान से [1] अल्लाह के नाम से, और अल्लाह के रसूल पर दुरूद [3] और सलाम हो [3] ऐ अल्लाह, मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे [4]।
स्रोत: [1]HR. Abu Dawud, lihat Shahih Al-Jami' no.4591. [2]HR. Ibnu As-Sunni no.88, dinyatakan Al-Albani "hasan". HR. Abu Dawud, lihat Shahih Al-Jami' 1/528. [3]HR. Muslim 1/494. [4]Dalam Sunan Ibnu Majah, dari hadits Fathimah "Allaahummagh fir li dzunubi waftahli abwaba rahmatik", Al-Albani menshahihkannya karena beberapa shahid. Lihat Shahih Ibnu Majah 1/128-129
ٱللَّهُمَّ أَنتَ ٱلسَّلَـٰمُ وَمِنكَ ٱلسَّلَـٰمُ فَحَيِّنَا رَبَّنَا بِٱلسَّلَامِ
मतलब
ऐ अल्लाह, बेशक तू अस-सलाम है (हर ऐब और कमी से पाक), और तुझसे ही सलामती है, तो ऐ हमारे रब, हमें सलामती के साथ ज़िंदा रख।
फ़ज़ीलत
सईद बिन मुसय्यब रहिमहुल्लाह (एक ताबिई आलिम) कहते थे कि जब वह मस्जिद-ए-हराम में दाख़िल होते और काबा देखते, तो ऊपर वाली दुआ पढ़ते।
स्रोत: Atsar riwayat Ibnu Abi Syaibah di al-Mushonnaf 7/102 dan al-Baihaqi di As-Sunan al-Kubro 5/73 dengan sanad yang shahih
फ़ज़ीलत
नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ऊँट पर सवार होकर बैतुल्लाह का तवाफ़ किया, जब भी आप हजर-ए-असवद (काबा का वह कोना जिसमें काला पत्थर है) के पास आते, तो अपने हाथ की किसी चीज़ से उसकी तरफ़ इशारा करते और तकबीर कहते।
स्रोत: HR. Al-Bukhari dengan Fathul Bari 3/476, maksud "sesuatu" adalah tongkat. Lihat Al-Bukhari dengan Fathul Bari 3/472
وَٱتَّخِذُوا۟ مِن مَّقَامِ إِبْرَٰهِـۧمَ مُصَلًّى
मतलब
और मक़ाम-ए-इब्राहीम को नमाज़ की जगह बना लो" (सूरह अल-बक़रा: 125)।
फ़ज़ीलत
मक़ाम-ए-इब्राहीम के पीछे सुन्नत नमाज़ पढ़ी जाती है
ٱللَّهُمَّ إِنِّىٓ أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَّافِعًا وَرِزْقًا وَٰسِعًا وَشِفَـَٔاءً مِّن كُلِّ دَءَاءٍ
मतलब
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे फ़ायदेमंद इल्म, कुशादा रोज़ी और हर बीमारी से शिफ़ा माँगता हूँ।
फ़ज़ीलत
नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से इसकी कोई ख़ास दुआ साबित नहीं है, इसलिए कोई भी दुआ माँग लें, क्योंकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया, "ज़मज़म का पानी उसी मक़सद के लिए है जिसके लिए उसे पिया जाए।" अलबत्ता इब्ने अब्बास से रिवायत है कि जब वह ज़मज़म पीते तो ऊपर वाली दुआ पढ़ते थे।
स्रोत: दारक़ुतनी ने अपनी सुनन नं. 2738 में रिवायत किया, लेकिन अल्बानी ने अल-इरवा 4/333 में इसे ज़ईफ़ कहा है क्योंकि इसकी सनद में अल-हकम बिन अबान अल-अदनी नाम के एक रावी हैं।
لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ وَحْدَهُۥ لَا شَرِيكَ لَهُۥ لَهُ ٱلْمُلْكُ وَلَهُ ٱلْحَمْدُ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ لَّآ إِلَـٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ وَحْدَهُۥٓ أَنجَزَ وَعْدَهُۥ وَنَصَرَ عَبْدَهُۥ وَهَزَمَ ٱلْأَحْزَابَ وَحْدَهُۥ
मतलब
बेशक सफ़ा और मरवा अल्लाह के दीन की निशानियों में से हैं। मैं सई वहीं से शुरू करता हूँ जिसे अल्लाह ने पहले ज़िक्र किया।
फ़ज़ीलत
जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सफ़ा पहाड़ी के क़रीब पहुँचे, तो आपने ऊपर वाली दुआ पढ़ी।
لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ وَحْدَهُۥ لَا شَرِيكَ لَهُۥ لَهُ ٱلْمُلْكُ وَلَهُ ٱلْحَمْدُ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ لَّآ إِلَـٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ وَحْدَهُۥٓ أَنجَزَ وَعْدَهُۥ وَنَصَرَ عَبْدَهُۥ وَهَزَمَ ٱلْأَحْزَابَ وَحْدَهُۥ
मतलब
अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही उसी की है और तारीफ़ भी उसी की। वह हर चीज़ पर क़ादिर है। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह अकेला है, उसने अपना वादा पूरा किया, अपने बंदे (मुहम्मद) की मदद की और दुश्मन के गिरोहों को अकेले शिकस्त दी।
फ़ज़ीलत
नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सफ़ा पहाड़ी पर चढ़ने से शुरुआत की, यहाँ तक कि (मुमकिन हो तो) काबा दिखाई दे। फिर क़िबला की तरफ़ रुख़ करें, तौहीद का कलिमा पढ़ें, 3 बार तकबीर कहें, फिर ऊपर वाली दुआ पढ़ें। फिर आपने दुआ माँगी। आपने इसे (ऊपर वाला ज़िक्र और दुआ) 3 बार पढ़ा। इस हदीस में बताया गया है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मरवा पर भी वैसे ही पढ़ा जैसे सफ़ा पर पढ़ा था।
स्रोत: HR. Muslim 2/888
ٱللَّهُمَّ ٱغْفِرْ وَٱرْحَمْ وَأَنتَ ٱلْأَعَزُّ ٱلْأَكْرَمُ
मतलब
ऐ मेरे रब, मुझे माफ़ कर दे और मुझ पर रहम फ़रमा। बेशक तू सबसे ज़्यादा इज़्ज़त वाला और सबसे ज़्यादा करम वाला है।
फ़ज़ीलत
सई के दौरान कोई ख़ास ज़िक्र मुक़र्रर नहीं है, इसलिए आप ज़िक्र कर सकते हैं, दुआ माँग सकते हैं या जो चाहें पढ़ सकते हैं। ऊपर वाली दुआ पढ़ने में कोई हर्ज नहीं, क्योंकि अब्दुल्लाह बिन मसऊद और अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत है कि वे सई करते वक़्त इसे पढ़ते थे।
स्रोत: HR. at-Tirmidzi
لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ وَحْدَهُۥ لَا شَرِيكَ لَهُۥ لَهُ ٱلْمُلْكُ وَلَهُ ٱلْحَمْدُ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ
मतलब
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही उसी की है और तारीफ़ उसी के लिए है। और वह हर चीज़ पर क़ादिर है।
फ़ज़ीलत
नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: सबसे बेहतरीन दुआ अरफ़ा के दिन की दुआ है, और सबसे बेहतरीन वह है जो मैंने और (मुझसे पहले के) नबियों ने पढ़ा।
स्रोत: HR. At-Tirmidzi dan lihat Shahih At-Tirmidzi 3/ 184. Al-Albani menyatakan, hadits tersebut adalah hasan. Lihat pula Al-Ahaditsush Shahihah lil-Albani 4/6
फ़ज़ीलत
फ़ज्र की नमाज़ के बाद नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने क़िबला की तरफ़ रुख़ किया, दुआ माँगी, तकबीर और तहलील और तौहीद का कलिमा पढ़ा। आप ख़ूब उजाला होने तक दुआ करते रहे। फिर सूरज निकलने से पहले (मिना के लिए) रवाना हो गए।
स्रोत: HR. Muslim 2/891
ٱللَّهُ أَكْبَرُ
मतलब
अल्लाह सबसे बड़ा है।
फ़ज़ीलत
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तीनों जमरात को छोटी कंकरी मारते वक़्त हर बार तकबीर कहते, फिर पहले और दूसरे जमरा को कंकरी मारने के बाद आगे बढ़कर क़िबला की तरफ़ रुख़ करके खड़े होते और दोनों हाथ उठाकर दुआ माँगते। रहा जमरा-ए-अक़बा, तो आप उसे कंकरी मारते और तकबीर कहते, लेकिन वहाँ नहीं ठहरते, बल्कि फ़ौरन लौट जाते (दुआ नहीं माँगते)
स्रोत: HR. Al-Bukhari dengan Fathul Bari 3/583, 3/584 dan 3/581. Muslim juga meriwayatkannya
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